उभरते हुए नए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्र्रीय आर्थिक परिदृष्य के मददेनजर पल-पल बदलते एवं अत्यधिक प्रतिर्स्पद्यत्मक पर्यावरण के अनुरूप स्वयं को ढालने के लिए संगठनों को एक नया दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है । परंपरागत संगठनों का प्रशिक्षार्थी संगठनों के रूप में व्यक्तित्वांतरण इस नए दृष्टिकोण का सार तत्व है । हमारा मानना है कि सांगठनिक शिक्षण जन आस्था और कार्यप्रणाली की अवधारणा को सतत रूप से पुनर्व्याख्यायित करने की प्रक्रिया का नाम है । हमें इस बात पर गर्व है कि गहरी प्रतिबद्यता और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ हम भारतीय खाद्य निगम में सीखने ज्ञानार्जन की संस्कृति को विकसित करने की इस महत्वपूर्ण भूमिका से संबध है ।